Kolaras tehsil of Shivpuri district,
Madhya Pradesh (India)
Kolaras tehsil of Shivpuri district,
Madhya Pradesh (India)
"पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और हर युवा को हुनरमंद बनाना ही हमारा लक्ष्य है।"
लुकवासा की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। हमारी माटी केवल धूल नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद और हमारी मेहनत का चंदन है। हम यहाँ सिर्फ अनाज नहीं उगाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाली का भविष्य सींचते हैं।
पंचायत का संकल्प है कि लुकवासा का हर युवा और किसान सशक्त बने। रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हमने मनरेगा, कौशल विकास और नारी शक्ति (स्वयं सहायता समूहों) के जरिए आर्थिक आजादी का एक नया ढांचा तैयार किया है। जब गाँव का हर युवा हुनरमंद होगा, तभी लुकवासा का मस्तक गर्व से ऊँचा होगा।
किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों की उपलब्धता।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) और मुफ्त मिट्टी जांच सुविधा।
किराए पर आधुनिक कृषि यंत्र (ट्रैक्टर, थ्रेसर आदि) की सुविधा।
वर्मी कंपोस्ट और नाडेप के माध्यम से जैविक खेती को प्रोत्साहन।
पशुओं के उपचार, टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान की सुलभ सुविधा।
मौसम का पूर्वानुमान, मंडी भाव और विशेषज्ञों से निःशुल्क कृषि सलाह।
किसानों को सालाना ₹6000 की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में।
म.प्र. सरकार द्वारा किसानों को प्रतिवर्ष दी जाने वाली अतिरिक्त आर्थिक सहायता।
प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान पर किसानों को बीमा कवर।
खेती के लिए बहुत ही कम ब्याज दर पर आसान और सुलभ ऋण सुविधा।
सिंचाई के लिए सोलर पंप लगवाने पर भारी सरकारी सब्सिडी।
ट्रैक्टर, रोटावेटर और अन्य आधुनिक कृषि उपकरणों की खरीद पर भारी सब्सिडी।
गाँव के सर्वांगीण विकास के लिए केवल कृषि पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसीलिए पंचायत लुकवासा में गैर-कृषि रोजगार (Non-Farm Employment) को तेज़ी से बढ़ावा दिया जा रहा है। स्थानीय संसाधनों पर आधारित लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना से युवाओं को गाँव में ही स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
सिलाई केंद्र, हस्तशिल्प, डेयरी फार्मिंग और ई-मित्र (CSC) जैसे डिजिटल सर्विस केंद्रों के माध्यम से गाँव के युवा और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रहे हैं। 'स्वयं सहायता समूहों' (SHG) द्वारा बनाये जा रहे उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर हमने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी है। इसके अतिरिक्त, मनरेगा के तहत 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार गाँव के हर पात्र मज़दूर का संबल बन रहा है।
"पंचायत के हर पात्र व्यक्ति को उसकी योग्यता अनुसार कृषि से इतर लघु उद्योगों और रोजगार से जोड़ना ही मेरा परम कर्तव्य है। पलायन रोकना हमारा मुख्य उद्देश्य है।"